OLD Pension Scheme 2026 — कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए क्या है नई उम्मीद?

ओल्ड पेंशन स्कीम (Old Pension Scheme) भारत की वह पारंपरिक पेंशन व्यवस्था थी, जिसमें सरकारी कर्मचारी अपनी सेवा से रिटायर होने के बाद अंतिम वेतन का लगभग 50% पेंशन जीवनभर प्राप्त करते थे।
यह एक डिफाइंड बेनिफिट प्लान था, जिसका भुगतान सरकारी खज़ाने से नियमित रूप से होता था। इस स्कीम में पेंशन की राशि पहले से तय रहती थी, चाहे बाजार की स्थिति कुछ भी हो। OPS को 2004 में बंद कर नई पेंशन सिस्टम (NPS) लागू कर दिया गया था, जिसमें बाजार आधारित निवेश के कारण पेंशन की राशि भविष्य में बढ़-घट सकती है।

2026 तक OLD Pension Scheme बहाली की मांग क्यों बन रही है?

केंद्रीय और राज्य सरकारों के कर्मचारियों के संगठनों ने OPS (Old Pension Scheme) की बहाली की मजबूत मांग की है, खासकर 8वें वेतन आयोग की समीक्षा के दौरान। कर्मचारी समूह चाहते हैं कि पुरानी पेंशन योजना को वापस लाया जाए या उसे समान लाभ देने वाला नया सिस्टम तैयार किया जाए।

उनका तर्क है कि NPS में पेंशन राशि बाजार की उतार-चढ़ाव पर निर्भर होती है, जिससे सेवानिवृत्त कर्मचारियों को स्थिर और भरोसेमंद पेंशन नहीं मिलती। OPS के वापस आने से व्यापक वित्तीय सुरक्षा मिलेगी और रिटायरमेंट के बाद जीवन स्तर में गिरावट नहीं होगी, यह कर्मचारियों की प्राथमिक मांग है।

सरकार का रुख क्या रहा है? — स्पष्ट जवाब

हाल के समय में सरकार ने लोकसभा में लिखित रूप से स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार फिलहाल OPS को वापस लागू करने का प्रस्ताव नहीं ला रही है। वित्त मंत्रालय और अन्य अधिकारियों का कहना है कि NPS और हालिया UPS (Unified Pension Scheme) जैसे सिस्टम कर्मचारियों को उचित पेंशन सुनिश्चित करते हैं और OPS को पुनः लागू करना अभी उचित नहीं माना जा रहा।

यह बयान कई सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए निराशाजनक हो सकता है, क्योंकि OPS बहाली लंबे समय से उनका मुख्य एजेंडा रहा है। वहीं, कुछ राज्यों में अलग बदलाव और आश्वासन भी मिल रहे हैं।

राज्यों में पेंशन पॉलिसी का बदलाव

कुछ राज्य सरकारें 2026 में अपनी पेंशन योजनाओं में अलग रास्ता अपना रही हैं।
उदाहरण के तौर पर केरल सरकार ने Assured Pension Scheme लागू करने का आदेश जारी किया है, जो NPS की जगह सेवानिवृत्त कर्मचारियों को उनके अंतिम वेतन का 50% तक सुनिश्चित पेंशन देने का लक्ष्य रखती है। यह योजना 1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाली है और विकल्प देता है कि कर्मचारी पहले से NPS में नामांकित हैं तो वे नई स्कीम में स्विच कर सकते हैं।

ऐसे कदम दर्शाते हैं कि राज्य स्तर पर पेंशन सुरक्षा को लेकर नए ढांचों और विकल्पों पर विचार किया जा रहा है, जिससे OPS के समान लाभ मिले। इन परिवर्तनों को देशभर में कर्मचारियों के लिए बेहतर पेंशन सुरक्षा के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

OPS और NPS में मुख्य अंतर

OPS के तहत पेंशन फिक्स्ड और जीवनभर जारी रहती थी। NPS में राशि बाजार निवेश पर निर्भर होती है और पेंशन की अंतिम रकम अर्निंग, मार्केट रिटर्न और योगदान पर निर्भर करती है। यह अंतर OPS को स्थिर बनाता था, जबकि NPS में जोखिम और लाभ दोनों मौजूद हैं।

NPS के समर्थक कहते हैं कि यह सिस्टम वित्तीय प्रबंधन और निवेश के अच्छे अवसर देता है, जबकि OPS समर्थक यह तर्क देते हैं कि स्थिर पेंशन भविष्य-सुरक्षा के लिहाज़ से बेहतर विकल्प था और है।

कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए क्या उम्मीदें हैं?

  1. 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों में पेन्शन सुधार: कर्मचारी संगठन चाहते हैं कि वेतन आयोग के अंतर्गत OPS को बहाल किया जाए और पेंशन को अंतिम वेतन का 50% सुनिश्चित किया जाए।
  2. एकीकृत पेंशन सिस्टम (UPS): केंद्र सरकार द्वारा लाया गया UPS का उद्देश्य NPS और अन्य योजनाओं को एकीकृत करके बेहतर सुरक्षा देना है।
  3. राज्यों का बढ़ता पेंशन सुरक्षा फोकस: केरल जैसी राज्य सरकारें पेंशन सुधार योजनाओं की दिशा में कदम उठा रही हैं।

इन तमाम चर्चाओं से यह स्पष्ट है कि पेंशन सुरक्षा का विषय 2026 में पॉलिटिकल और आर्थिक एजेंडा का एक बड़ा हिस्सा बन गया है, और भविष्य में बदलाव की संभावना बनी हुई है।

क्या OPS 2026 में लागू होगी? — विशेषज्ञों की राय

विशेषज्ञों का मानना है कि OPS को सीधे वापस लाना राजकोषीय बोझ बढ़ा सकता है, क्योंकि सुनिश्चित पेंशन का बोझ सरकार पर लंबे समय तक रहेगा। इसलिए कई नीतिकार एक ऐसे मिश्रित समाधान को प्रस्तावित करते हैं, जिसमें स्थिर पेंशन के लाभ तो हों लेकिन वित्तीय बोझ नियंत्रित रहे।

राज्य सरकारों द्वारा अपनाए जा रहे विकल्प, जैसे Assured Pension Scheme, इस दिशा में मध्य मार्ग के रूप में आगे बढ़ रहे हैं।

अब आगे क्या?

2026 में सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स को OPS, NPS और UPS से जुड़ी सार्वजनिक बहस और निर्णयों पर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि पेंशन की संरचना और लाभ सीधे उनकी आर्थिक सुरक्षा को प्रभावित करते हैं।

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