RBI की बड़ी राहत: डिजिटल फ्रॉड पीड़ितों को अब ₹25,000 तक मुआवज़ा मिलेगा! जानिए पूरी योजना, कैसे मिलेगा लाभ और क्या है नियम

नई दिल्ली: डिजिटल लेन-देनों के बढ़ते चलन के साथ देश भर में ऑनलाइन फ्रॉड (उदाहरण-UPI, नेट-बैंकिंग, मोबाइल वॉलेट धोखाधड़ी) के मामले भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच रहे हैं। इसी चुनौती को देखते हुए भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने ग्राहकों को बड़ी सुरक्षा कवच और राहत योजना देने की तैयारी शुरू कर दी है। इस नई योजना के तहत (RBI Digital Fraud Update) छोटे-मूल्य के डिजिटल फ्रॉड के पीड़ितों को ₹25,000 तक मुआवज़ा दिया जाएगा — भले ही गलती से ग्राहक ने OTP साझा कर दिया हो या फिशिंग लिंक पर क्लिक कर दिया हो।


📌 क्यों आई यह योजना?

Digital Fraud की घटनाओं में तेजी से वृद्धि देखी जा रही है। खासकर छोटे-मूल्य के धोखाधड़ी मामलों में लोगों को काफी नुकसान उठाना पड़ता है, वहीं शिकायत दर्ज कराने और पैसा वापस पाने की प्रक्रिया मुश्किल होती है। RBI के आंकड़ों के मुताबिक लगभग 65% फ्रॉड मामलों में राशि ₹50,000 से कम होती है, और इन मामलों में पीड़ितों का आर्थिक और मानसिक बोझ बढ़ता जा रहा है।

इस सबको देखते हुए RBI ने ग्राहक संरक्षण और राहत के लिए एक नया प्रावधान तैयार किया है, जिससे आम नागरिकों को त्वरित राहत मिल सके और धोखाधड़ी के मामलों में उनकी वित्तीय हानि कुछ हद तक कवर हो सके।


🛡️ क्या है नया मुआवज़ा ढांचा?

RBI ने प्रस्तावित रूप से एक कम्पेनसेशन फ्रेमवर्क (मुआवज़ा ढांचा) तैयार किया है, जिसके मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

🔹 ₹25,000 तक मुआवजा

छोटे-मूल्य के डिजिटल फ्रॉड मामलों में पीड़ितों को ₹25,000 तक मुआवजा मिलेगा

🔹 किसे मिलेगा लाभ?

• डिजिटल धोखाधड़ी के शिकार हर व्यक्ति
• चाहे गलती से OTP साझा की हो
• चाहे फिशिंग लिंक पर क्लिक कर दिया हो
• चाहे Social Engineering के कारण डेटा साझा किया हो

उपरोक्त किसी भी वजह से हुए नुकसान पर मुआवजा प्रदान किया जाएगा।

🔹 कंपंसेशन कैसे काम करेगा?

प्रस्ताव के अनुसार, धोखाधड़ी की राशि का एक हिस्सा ग्राहक द्वारा, एक हिस्सा बैंक द्वारा और बाक़ी RBI द्वारा कवर किया जाएगा। लेकिन कुल मुआवजा ₹25,000 से अधिक नहीं मिलेगा।

उदाहरण के लिए:

  • अगर ₹30,000 का फ्रॉड हुआ — मुआवजा ₹25,000
  • अगर ₹10,000 का फ्रॉड हुआ — उसके हिसाब से मुआवजा मिलेगा लेकिन ₹25,000 की सीमा से ऊपर नहीं

💰 मुआवज़ा कहां से आएगा?

इस मुआवज़ा योजना के लिए धन RBI के “डिपॉज़िटर एजुकेशन एंड अवेयरनेस (DEA) फंड से इस्तेमाल किया जाएगा — यह एक ऐसा ट्रस्टेड फंड है जिसे निष्क्रिय जमा खातों, अनसुलझे बैलेंस और अन्य स्रोतों से इकट्ठा किया जाता है। इसका लक्ष्य हमेशा ग्राहकों के हितों की रक्षा और वित्तीय सुरक्षा बढ़ाना रहा है।


📋 शिकायत दर्ज करना है बेहद ज़रूरी

मुआवज़ा पाने के लिए यह कदम उठाना अत्यंत आवश्यक होगा:

✔ बैंक को तुरंत सूचित करें
साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें
✔ लेन-देनों का सबूत सुरक्षित रखें
✔ बैंक से पुष्टिकरण और केस नंबर प्राप्त करें

अगर आप समय पर शिकायत नहीं दर्ज कराते हैं, तो दावा खारिज हो सकता है।


📉 ग्राहक की गलती भी अब नहीं बनेगी बड़ी बाधा

पहले डिजिटल फ्रॉड मामलों में जब ग्राहक ने गलती से OTP साझा किया या लिंक पर क्लिक कर दिया, तो ज़्यादातर बैंकों या नियमों के अनुसार वह अपनी जिम्मेदारी खुद उठाते थे। लेकिन इस नए ढांचे में यह गलती अब वापस लेने की प्रक्रिया में बाधा नहीं बनेगी — बशर्ते ग्राहक समय पर शिकायत करे।


📊 क्या इसे सभी डिजिटल धोखाधड़ी मामलों में मिलेगा?

इस मुआवज़ा स्कीम का मुख्य उद्देश्य छोटे-मूल्य के फ्रॉड पर राहत देना है। बड़े-मूल्य के मामलों के लिए अलग से बैंक और साइबर सुरक्षा नियम लागू होते हैं। वही RBI की यह प्रक्रिया विशेषकर उन आरोपों पर लागू हो सकती है जिनमें:

📍 अनधिकृत लेन-देना
📍 फर्जी प्रमाणीकरण
📍 मोबाइल बैंकिंग/UPI धोखाधड़ी
📍 बैंकिंग ऐप्स के ज़रिये फ्रॉड जैसे मामलों में
📍 “सामान्य गलती” के तहत हुए नुकसान पर भी मुआवजा


❗ क्या पहली बार की धोखाधड़ी पर ही मुआवज़ा मिलेगा?

हाँ, RBI ने यह सुझाव दिया है कि हर व्यक्ति केवल एक बार इस मुआवज़ा का दावा कर सकता है। इसका मतलब है कि अगर भविष्य में आप फिर से डिजिटल फ्रॉड का शिकार होते हैं, तो इस एक-बार की सीमा से अधिक मुआवजा नहीं मिलेगा।


📈 विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

न्यूज़ रिपोर्टों के अनुसार, डिजिटल फ़्रॉड के मामले लगातार बढ़ रहे हैं और आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है। ऐसे समय में RBI का यह कदम ग्राहकों के लिए राहत भरा है और यह वित्तीय सुरक्षा के सिद्धांत को और मजबूत करेगा, ऐसा माना जा रहा है।


📌 उपभोक्ताओं के लिए सलाह

📍 डिजिटल लेन-देनों में सतर्क रहें
📍 किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें
📍 अपने बैंकिंग डिटेल्स को सुरक्षित रखें
📍 अगर फ्रॉड होता है तो तुरंत शिकायत करें

सतर्कता से ही आप डिजिटल धोखाधड़ी से बच सकते हैं और यदि आप फंस भी जाते हैं तो यह नई योजना आपको आर्थिक सहायता दे सकती है।


निष्कर्ष

RBI की यह नई ग्राहक सुरक्षा योजना देश के लाखों डिजिटल भुगतान उपयोगकर्ताओं के लिए एक बड़ी राहत साबित होगी। छोटे-मूल्य के धोखाधड़ी मामलों में ₹25,000 तक का मुआवज़ा सीधे पीड़ितों के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह काम करेगा। डिजिटल दुनिया जितनी तेजी से बढ़ रही है, उसके साथ सुरक्षा उपाय भी लगातार विकसित हो रहे हैं — और RBI का यह कदम उस दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

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