नई दिल्ली। देश के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने बड़ा फैसला लिया है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने MSME के लिए बिना गारंटी (MSME Loan Collateral Free) लोन की सीमा बढ़ाकर ₹20 लाख तक कर दी है। इस फैसले से लाखों छोटे कारोबारियों, स्टार्टअप्स और स्वरोजगार करने वाले युवाओं को सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है।
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क्या है नया फैसला? (MSME Loan)
RBI के ताजा दिशा-निर्देशों के अनुसार अब पात्र MSME इकाइयों को ₹20 लाख तक का लोन बिना किसी संपत्ति या गारंटी के मिल सकेगा। पहले यह सीमा कम थी, जिससे छोटे व्यवसायों को पूंजी जुटाने में कठिनाई होती थी।
यह कदम MSME सेक्टर में नकदी प्रवाह (Liquidity) बढ़ाने और रोजगार सृजन को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
MSME सेक्टर को क्यों है यह राहत?
MSME सेक्टर देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। यह क्षेत्र करोड़ों लोगों को रोजगार देता है और GDP में महत्वपूर्ण योगदान करता है।
बिना गारंटी लोन की सीमा बढ़ने से:
- छोटे व्यापारियों को वर्किंग कैपिटल में आसानी होगी
- स्टार्टअप्स को शुरुआती पूंजी मिलेगी
- ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में उद्यमिता बढ़ेगी
- बैंकिंग सिस्टम से फाइनेंस लेना आसान होगा
सरकार पहले ही MSME के लिए कई योजनाएं चला रही है, जिनमें CGTMSE (Credit Guarantee Fund Trust for Micro and Small Enterprises) भी शामिल है।
किन कारोबारियों को मिलेगा फायदा?
यह सुविधा उन व्यवसायों को मिलेगी जो MSME श्रेणी में पंजीकृत हैं। MSME रजिस्ट्रेशन के लिए उद्यम पोर्टल पर आवेदन करना होता है।
अगर आपने अभी तक MSME रजिस्ट्रेशन नहीं कराया है, तो पहले पंजीकरण कराएं, ताकि आप इस योजना का लाभ उठा सकें।
बैंक लोन प्रक्रिया कैसे होगी?
- बैंक या NBFC में आवेदन
- आवश्यक दस्तावेज जमा करना
- बिजनेस प्लान और आय का विवरण
- क्रेडिट स्कोर की जांच
- पात्रता के आधार पर स्वीकृति
RBI के दिशा-निर्देशों के अनुसार बैंक जोखिम मूल्यांकन के बाद लोन स्वीकृत करेंगे।
विशेषज्ञों की राय
वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि RBI का यह कदम छोटे उद्योगों के लिए गेमचेंजर साबित हो सकता है। इससे अनौपचारिक सेक्टर के कारोबारियों को औपचारिक बैंकिंग सिस्टम से जोड़ने में मदद मिलेगी और आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी।
निष्कर्ष
MSME सेक्टर के लिए ₹20 लाख तक की बिना गारंटी लोन सीमा बढ़ाना एक सकारात्मक और दूरगामी फैसला माना जा रहा है। इससे छोटे व्यापारियों को आत्मनिर्भर बनने और अपने कारोबार को विस्तार देने में बड़ी मदद मिलेगी।